Sarso Price Hike: रिकॉर्ड तोड़ तेजी! सरसों की कीमतें सातवें आसमान पर, जानें ताज़ा रेट यहां

Sarso Price Hike

Sarso Price Hike: सरसों की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ तेजी! जानें क्यों सातवें आसमान पर हैं सरसों के ताज़ा रेट, और आपके शहर में क्या है इसका दमदार भाव।

क्या आपकी रसोई का बजट भी सरसों के तेल की बढ़ती कीमतों से प्रभावित हो रहा है?

अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं! भारतीय बाजार में सरसों की कीमतों ने हाल के दिनों में रिकॉर्ड तोड़ तेजी दिखाई है, जिससे यह सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं। यह केवल उपभोक्ताओं के लिए ही नहीं, बल्कि किसानों और व्यापारियों के लिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है। आइए जानते हैं कि इस जबरदस्त उछाल के पीछे क्या कारण हैं और आज आपके शहर में सरसों का ताज़ा रेट क्या चल रहा है। यह स्थिति सचमुच धमाकेदार है और हर किसी को प्रभावित कर रही है।

Sarso Price Hike: क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?

सरसों की कीमतों में इस अभूतपूर्व वृद्धि के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों से जुड़े हैं:

1. कमजोर फसल उत्पादन और आपूर्ति में कमी (Weak Crop Production & Supply Shortage)

  • कम उत्पादन: इस साल कुछ क्षेत्रों में सरसों की फसल का उत्पादन उम्मीद से कम रहा है। बेमौसम बारिश या अन्य मौसमी बदलावों के कारण पैदावार प्रभावित हुई है, जिससे बाजार में सरसों की आवक कम हो गई है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में मंडियों में सरसों की आवक में रिकॉर्ड 39% की कमी दर्ज की गई है।
  • किसानों द्वारा स्टॉक करना: किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ेंगी, इसलिए वे अपनी उपज को मंडियों में बेचने के बजाय स्टॉक कर रहे हैं। यह रणनीति भी बाजार में आपूर्ति को कम कर रही है, जिससे कीमतों में जोरदार उछाल आ रहा है।

2. अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों की तेजी (Rise in International Edible Oil Prices)

  • वैश्विक मांग: अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों, विशेषकर पाम तेल और सोयाबीन तेल की कीमतों में तेजी आई है। इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे प्रमुख पाम तेल उत्पादक देशों में कीमतों में वृद्धि का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ता है, क्योंकि भारत खाद्य तेलों का एक बड़ा आयातक है।
  • आयात शुल्क: हालांकि हाल ही में सरकार ने कच्चे खाद्य तेलों पर बेसिक सीमा शुल्क (BCD) को 20% से घटाकर 10% कर दिया है (जून 2025 में), जिसका उद्देश्य कीमतों को स्थिर करना था, लेकिन वैश्विक बाजारों की अस्थिरता अभी भी बनी हुई है। भारत सालाना लगभग 140-150 लाख टन से अधिक खाद्य तेल आयात करता है, जिसमें पाम ऑयल का हिस्सा लगभग 57% है।

3. घरेलू मांग में वृद्धि (Increase in Domestic Demand)

  • त्योहारी मांग: त्योहारी सीजन के दौरान सरसों के तेल की मांग स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।
  • शुद्धता की प्राथमिकता: उपभोक्ता शुद्ध सरसों के तेल को प्राथमिकता दे रहे हैं, क्योंकि यह अन्य आयातित तेलों की तुलना में सस्ता और शुद्ध माना जाता है, जिसमें मिलावट की गुंजाइश कम होती है।

4. सरकार की नीतियां और किसानों की उम्मीदें (Government Policies & Farmers’ Expectations)

  • एमएसपी (MSP) से ऊपर दाम: सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹5,650 प्रति क्विंटल से कहीं ऊपर सरसों का भाव बिक रहा है। यह किसानों के लिए फायदेमंद है और उन्हें अपनी फसल रोकने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। उदाहरण के लिए, राजस्थान की मंडियों में आज सरसों का भाव ₹6,620 से ₹7,190 प्रति क्विंटल तक चल रहा है।

जानें ताज़ा रेट यहां: आपके शहर में सरसों का भाव (Today’s Latest Mustard Prices)

सरसों की कीमतों में लगातार बदलाव होता रहता है। नीचे कुछ प्रमुख राज्यों और शहरों में आज (14 जुलाई 2025) के कुछ संभावित ताज़ा रेट दिए गए हैं। यह दरें मंडी और गुणवत्ता के अनुसार भिन्न हो सकती हैं।

  • राजस्थान में सरसों का भाव:
    • जयपुर: ₹6800 / क्विंटल (लगभग ₹68/किलो)
    • मालपुरा: ₹5396 – ₹7190 / क्विंटल
    • बांदीकुई: ₹6350 – ₹6800 / क्विंटल
    • देवली: ₹5900 – ₹6740 / क्विंटल
  • उत्तर प्रदेश में सरसों का भाव:
    • लखनऊ: ₹6000 – ₹6200 / क्विंटल (लगभग ₹61/किलो)
    • अछनेरा: ₹6850 / क्विंटल
    • लखीमपुर: ₹6170 / क्विंटल
    • फैजाबाद: ₹6040 / क्विंटल
  • सरसों तेल के कुछ औसत भाव (रिटेल):
    • उत्तर प्रदेश में औसत ₹142/किलो (₹14100 – ₹14300 प्रति क्विंटल)
    • राजस्थान में औसत ₹145-210/लीटर (ब्रांड और गुणवत्ता के अनुसार)

Sarso Price Hike:आगे क्या? (What Next?)

विशेषज्ञों का मानना है कि नई फसल आने तक सरसों की कीमतों में यह उठापटक जारी रह सकती है। सरकार द्वारा घरेलू तिलहन उत्पादन को बढ़ाने के लिए “राष्ट्रीय तिलहन मिशन” जैसी पहल की जा रही हैं, जिसका लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 19,000 करोड़ रुपये खर्च करना है। यह किसानों को तिलहन की खेती के लिए प्रोत्साहन देगा और अंततः आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा। तब तक, उपभोक्ताओं को सरसों की कीमतों में इस धाँसू उछाल का सामना करना पड़ सकता है।

संबंधित ब्लॉग पोस्ट:

Ashish Chanchlani Net Worth ₹40 करोड़? जानकर उड़ जाएंगे होश!

Kawasaki Ninja ZX-10R: दमदार 998cc इंजन, 200+ BHP पावर और हाईटेक फीचर्स के साथ लॉन्च

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार: https://agri.nic.in/

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI): https://www.fssai.gov.in/

Related Post