संयुक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी सभा में जब दुनिया भर के देश शांति और विकास पर चर्चा कर रहे थे, तब भारत की एक युवा राजनयिक ने पाकिस्तान के झूठ का पर्दाफाश कर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। भारतीय डिप्लोमैट पेटल गहलोत ने अपने ‘राइट ऑफ रिप्लाई’ का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान को ऐसा आईना दिखाया, जिससे उसकी वैश्विक छवि पर लगे दाग और गहरे हो गए।
भारत का साफ जवाब: आतंकवाद खत्म किए बिना बातचीत नहीं
भारत ने एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखा है। पेटल गहलोत ने स्पष्ट किया कि जिस देश की धरती से आतंकवाद फैलता हो, उसके साथ बातचीत का कोई सवाल ही नहीं उठता। शांति और बंदूक की नोक एक साथ नहीं चल सकते। भारत विकास और दोस्ती का पक्षधर है, लेकिन यह देश की सुरक्षा की कीमत पर कभी नहीं होगा।
भारत का यह संदेश सिर्फ पाकिस्तान के लिए नहीं, बल्कि उन सभी देशों के लिए था जो आतंकवाद पर दोहरा रवैया अपनाते हैं। भारत ने साफ कहा कि पाकिस्तान को अपनी धरती पर पल रहे आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस और निर्णायक कार्रवाई करनी होगी। जब तक सीमा पार से आतंकवाद बंद नहीं होता, तब तक किसी भी तरह की बातचीत की उम्मीद करना व्यर्थ है।
पाकिस्तान के दावे और भारत की जवाबी कार्रवाई
हमेशा की तरह, पाकिस्तान ने इस वैश्विक मंच का इस्तेमाल भारत के खिलाफ झूठे आरोप लगाने और कश्मीर का मुद्दा उठाने के लिए किया। पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने अपने भाषण में भारत की आंतरिक राजनीति पर टिप्पणी करते हुए दुनिया का ध्यान अपनी नाकामियों से हटाने की कोशिश की। यह पाकिस्तान की पुरानी रणनीति रही है, जिसे वह हर बड़े मंच पर दोहराता है।
इसके जवाब में भारत ने ‘राइट ऑफ रिप्लाई’ का इस्तेमाल किया। पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के हर एक दावे को तथ्यों के साथ खारिज कर दिया। उन्होंने बताया कि कैसे पाकिस्तान खुद मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघनकर्ता है, जहाँ अल्पसंख्यकों पर अत्याचार आम बात है। भारत का यह पलटवार बेहद सधा हुआ और प्रभावी था, जिसने पाकिस्तान को निरुत्तर कर दिया।
भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान की पोल खोल दी
युवा भारतीय राजनयिक पेटल गहलोत ने अपने संक्षिप्त लेकिन असरदार भाषण में पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को उजागर कर दिया। उन्होंने दुनिया को याद दिलाया कि ओसामा बिन लादेन जैसे खूंखार आतंकवादी को पाकिस्तान ने ही पनाह दी थी। उन्होंने कहा कि जो देश आतंकवादियों को शहीद बताता हो, उसे किसी दूसरे देश को उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
गहलोत ने पाकिस्तान को सलाह दी कि वह भारत पर उंगली उठाने से पहले अपने गिरेबान में झाँके। उन्होंने पाकिस्तान के खराब आर्थिक हालात, राजनीतिक अस्थिरता और बलूचिस्तान में हो रहे मानवाधिकार हनन का भी जिक्र किया। इस जवाबी हमले ने पाकिस्तान द्वारा बनाए गए झूठे नैरेटिव की हवा निकाल दी और दुनिया के सामने उसकी असलियत उजागर कर दी।
पाकिस्तान पर दुनिया का दबाव बढ़ा, मुश्किलें बढ़ीं
UNGA जैसे बड़े मंच पर बार-बार बेनकाब होने से पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि को भारी नुकसान पहुँचा है। अब दुनिया के ज्यादातर देश यह मानने लगे हैं कि पाकिस्तान आतंकवाद का केंद्र है। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान का बने रहना इसी का एक बड़ा उदाहरण है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।
भारत की सफल कूटनीति के कारण पाकिस्तान अब वैश्विक मंचों पर अलग-थलग पड़ता जा रहा है। कोई भी देश अब उसके झूठे दावों पर आसानी से विश्वास नहीं करता। अगर पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आता, तो आने वाले दिनों में उसकी मुश्किलें और भी बढ़ सकती हैं और उसे गंभीर आर्थिक और कूटनीतिक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।
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Disclaimer: यह लेख उपलब्ध सूचनाओं और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना है। यह किसी व्यक्ति, समूह या देश की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का इरादा नहीं रखता।
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