11 साल का सफर: PM Jan Dhan Yojana ने कैसे बदली करोड़ों भारतीयों की ज़िंदगी

PM Jan Dhan Yojana 2025

11 साल में PM Jan Dhan Yojana ने वित्तीय समावेशन की क्रांति ला दी है। जानें कैसे जीरो बैलेंस खातों और DBT ने करोड़ों भारतीयों, खासकर महिलाओं को सशक्त बनाया।

एक दशक पहले तक, भारत की एक बहुत बड़ी आबादी बैंकिंग सिस्टम से कोसों दूर थी। उनके पास न तो कोई बैंक खाता था और न ही सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे उन तक पहुँच पाता था। लेकिन अगस्त 2014 में शुरू हुई PM Jan Dhan Yojana ने इस तस्वीर को हमेशा के लिए बदल दिया। आज अपने 11वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी यह योजना सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के आर्थिक सम्मान और सशक्तिकरण का प्रतीक बन चुकी है।

इस योजना ने न केवल हर गरीब को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा, बल्कि उनकी ज़िंदगी में एक ऐसा बदलाव लाया जिसकी कल्पना भी मुश्किल थी। चलिए जानते हैं कि इस 11 साल के सफर में PM Jan Dhan Yojana ने कैसे देश की तस्वीर बदली।

सिर्फ एक बैंक खाता नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा की गारंटी

PM Jan Dhan Yojana का मुख्य उद्देश्य देश के हर नागरिक को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना था, जिसे ‘वित्तीय समावेशन’ (Financial Inclusion) कहते हैं। इससे पहले, दिहाड़ी मजदूर, छोटे किसान और महिलाएं अक्सर अपनी छोटी-छोटी बचत को घर पर रखने को मजबूर थे, जहाँ वह असुरक्षित थी। जन धन खाते ने उन्हें एक सुरक्षित ठिकाना दिया।

  • जीरो बैलेंस की सुविधा: इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि कोई भी व्यक्ति बिना किसी मिनिमम बैलेंस की चिंता किए अपना बैंक खाता खोल सकता था।
  • RuPay डेबिट कार्ड: हर खाताधारक को एक RuPay डेबिट कार्ड दिया गया, जिससे वे ATM से पैसे निकाल सकते थे और डिजिटल लेनदेन कर सकते थे।
  • ओवरड्राफ्ट और बीमा: इसके साथ ही ₹10,000 तक की ओवरड्राफ्ट (लोन) सुविधा और ₹2 लाख का दुर्घटना बीमा कवर भी दिया गया, जिसने गरीबों को एक आर्थिक सुरक्षा कवच प्रदान किया।

PM Jan Dhan Yojana का प्रभाव: आंकड़ों की ज़ुबानी

इस योजना की सफलता को आंकड़ों से बेहतर कुछ नहीं बता सकता।

  • आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, आज तक PM Jan Dhan Yojana के तहत 53 करोड़ से भी अधिक बैंक खाते खोले जा चुके हैं। यह संख्या दुनिया के कई देशों की कुल आबादी से भी ज्यादा है।
  • इन खातों में कुल जमा राशि ₹2.30 लाख करोड़ को पार कर गई है, जो दिखाता है कि देश के गरीबों ने बचत की आदत को कितनी तेजी से अपनाया है।

डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) की रीढ़

इस योजना की सबसे बड़ी सफलता सरकारी योजनाओं के पैसे को सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंचाना है।

  • PM-KISAN, गैस सब्सिडी, मनरेगा की मजदूरी और विभिन्न पेंशन योजनाओं का पैसा अब बिना किसी बिचौलिए के सीधे इन जन धन खातों में आता है।
  • कोरोना महामारी के दौरान सरकार द्वारा दी गई आर्थिक मदद भी इन्हीं खातों के जरिए करोड़ों लोगों तक तुरंत पहुंची, जिसने उन्हें उस मुश्किल समय में बहुत बड़ा सहारा दिया।

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Disclaimer: इस लेख में दिए गए आंकड़े और जानकारी आधिकारिक स्रोतों पर आधारित हैं और समय के साथ बदल सकते हैं। नवीनतम जानकारी के लिए हमेशा आधिकारिक वेबसाइट देखें।

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